इतिहास और गौरवशाली विरासत
इतिहास में चित्तौड़गढ़ का नाम आते ही महाराणा प्रताप, सांगा और कुंभा जैसे वीरों; मीरा बाई जैसी भक्त शिरोमणि; भामाशाह जैसे दानवीर; कर्माशाह जैसे धर्मवीर; और आचार्य हरिभद्र जैसे महान विद्वानों की गौरवशाली छवियाँ उभरती हैं। यह चित्रकूट की वह पवित्र धरा है जहाँ शक्ति और भक्ति के साथ जैन गौरव का वैभव सदियों से सुरक्षित है।
चित्तौड़गढ़ की यह पावन धरा शक्ति, भक्ति और जैन वैभव का अद्भुत संगम है, जहाँ सदियों का इतिहास पत्थर की दीवारों पर अंकित है।
ऐतिहासिक समयरेखा
माध्यमिका का उत्थान
सम्राट अशोक के पौत्र संप्रति के समय आर्य परिवर्तन ने माध्यमिका (नगरी) को अपना केंद्र बनाया।
श्रीजनपद की राजधानी
महाभारत काल से प्रसिद्ध श्रीजनपद की राजधानी माध्यमिका नगरी अपने चरम वैभव पर थी।
सीमंदर शाह का आगमन
सीमंदर शाह ने केरापुरपट्टन में व्यापार प्रारंभ किया और भाग्य से अपार लक्ष्मी प्राप्त की।
पंचतीर्थ प्रतिष्ठा
आचार्य यशोभद्र सूरि के मार्गदर्शन में चित्तौड़गढ़ सहित पांच तीर्थों की भव्य प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई।
शांतिनाथ मंदिर
रत्नेश्वर तालाब के पास भगवान शांतिनाथ जी के कलात्मक मंदिर का निर्माण।
भंडारी वेला का योगदान
भंडारी श्रेष्ठी वेला द्वारा उत्तर दिशा के पाश्र्वनाथ प्रभु मंदिर का निर्माण कराया गया।
कर्माशाह दोशी का युग
कर्माशाह दोशी द्वारा दक्षिण दिशा के पाश्र्वनाथ मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया।
हरिभद्रसूरि स्मृति
1444 ग्रंथों के रचयिता आचार्य हरिभद्रसूरि जी के स्मृति मंदिर की प्रतिष्ठा।
किले के मंदिर
सात बीस देवरी परिसर
1. श्री सातबीस देवरी जैन मंदिर समूह
972 ईस्वी (प्रतिष्ठा)27 देवरियों से घिरा यह भव्य मंदिर परिसर जैन वास्तुकला की सात्विक सादगी और विपुल अलंकरण का साक्षी है।
2. उत्तराभिमुख पाश्र्वनाथ मंदिर (भंडारी वेला)
1448 ईस्वीभंडारी श्रेष्ठी वेला द्वारा निर्मित यह मंदिर अपने बारीक शिल्प और आचार्यों की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
3. दक्षिणाभिमुख पाश्र्वनाथ मंदिर (कर्माशाह दोशी)
1530 ईस्वीतोलाशाह और उनके सुपुत्र कर्माशाह दोशी द्वारा निर्मित यह मंदिर भक्ति और त्याग का प्रतीक है।
4. शांतिनाथ एवं महावीर स्वामी मंदिर
1175 - 1444 ईस्वीरत्नेश्वर तालाब के समीप स्थित ये मंदिर अपनी प्राचीनता और शांत वातावरण के लिए जाने जाते हैं।
5. चैमुखा पाश्र्वनाथ मंदिर
1491 संवतगौमुख कुण्ड के समीप स्थित यह मंदिर अपने अनूठे पाषाण शिल्प और कन्नड़ शिलालेखों के लिए प्रसिद्ध है।
शहर के श्वेताम्बर मंदिर
चित्तौड़गढ़ नगर में स्थित मंदिर
4. श्री ऋषभदेव मंदिर (धीमों का मंदिर)
400 वर्ष पुरानादुर्ग की तलहटी में स्थित यह मंदिर 'धीग' गोत्र के श्रावकों द्वारा श्रद्धापूर्वक बनाया गया था।
5. श्री हरिभद्रसूरि स्मृति मंदिर
1973 ईस्वीमहान दार्शनिक आचार्य हरिभद्रसूरि जी की पावन स्मृति में निर्मित यह मंदिर ज्ञान और वैराग्य का केंद्र है।
दिगम्बर जैन मंदिर
दिगम्बर परंपरा के पवित्र स्थल
9. श्री मल्लिनाथ भगवान मंदिर (महावीर प्रासाद)
1428 ईस्वीकीर्ति स्तंभ के समीप स्थित यह मंदिर दिगम्बर परंपरा के प्राचीन वैभव को दर्शाता है।
11. श्री सुपाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर
2005 ईस्वीआधुनिक वास्तुशिल्प का यह सुंदर मंदिर दिगम्बर जैन समाज की धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।
स्मारक
जैन वास्तुकला के अद्भुत नमूने
13. कीर्ति स्तंभ (जैन गौरव का प्रतीक)
11वीं - 12वीं शताब्दी76 फीट ऊँचा यह सात मंजिला स्तंभ भगवान आदिनाथ को समर्पित जैन स्थापत्य का विश्व प्रसिद्ध नमूना है।
यह केवल मुख्य मंदिरों का संक्षिप्त विवरण है। चित्तौड़गढ़ में और भी कई ऐतिहासिक जैन मंदिर हैं जो हमारी समृद्ध विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।